भारत को आजाद हुए सौ साल भी नहीं हुए और देश के नागरिकों ने न जाने कितने छोटे दंगों और अनेक बड़े दंगों, दुर्घटनाओं की विभिषिका को झेला है। जिसमें देश के हजारों निरपराधों की जान मुफ्त में चली गई, और परिजनों की आंख पीड़ा और दंस को झेलते पथरा गईं, अब इन परिवारों को रुलाने की कोशिश भी की जाय तो आंसू नहीं निकलते। आजादी के इन साठ-पैसठ सालों में कांग्रेस देश की नीति-निर्धारक रही है। याद दिलाने की बात है कि इन दिनों सत्ता में वह कांग्रेस थी, जिसके पास न गांधी थे, न पटेल , सुभाष भी नहीं थे यही नहीं वह सैकड़ों देशभक्त भी नहीं थे, जो काल के क्रूर पंजों से हमारी रक्षा के लिए बच न सके थे, या कांग्रेस से उपेक्षित कर दिए गए थे या समय ने ठटरियों को कमजूर कर दिया था (जिनकी कुर्बानियों के चलते आज भी देश में कांग्रेस के प्रति लोगों की श्रद्धा और आस्था है)। बल्कि सत्ता में वह कांग्रेस थी, जिसके पास सज्जन सिंह जिंदल थे, जिसके पास अर्जुन सिंह थे, जिनके पास पीवी नरसिंह राव थे और रिमोट कंट्रोल सिर्फ एक परिवार के हाथ था। ऐसे में गाहे-बगाहे या कहूं देश में आए दिन, नागरिकों के कत्लेआम में कांग्रेसियों पर सवाल खड़े होना कोई नई बात नहीं है। भोपाल में जो त्रासदी हुई वास्तव में वह हादसा नहीं हत्या थी क्योंकि राजधानी में किसी फैक्ट्री में क्या हो रहा है जबकि सारा तंत्र वहीं से काम करता है सरकार को न मालूम हो, हो नहीं सकता और नहीं मालूम हुआ तो यह और भी चिंता कि बात की .... फिर सरकार किस काम की। गौरतलब है कि जिस भोपाल गैस त्रासदी में मप्र के हजारों लोग मारे गए, और लाखों अब भी उसकी पीड़ा भोग रहे हैं, उस समय देश और प्रदेश में कांग्रेस का ही शासन था (यही नहीं जब सिखों का कत्लेआम हुआ और बाबरी ध्वंस हुआ केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी और खुफिया एजेंसियों को इसकी शंका भी थी, लेकिन रोकने के कोई उपाय नहीं किये गए। अगर समस्या न होती तो समाधान के नाम पर मलाई कैसे खाते)। ऐसे में मध्यप्रदेश में हुए गैस त्रासदी के दोषी को एंडरसन को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह द्वारा सरकारी मेहमान की तरह सरकारी विमान से अमेरिका भेजना अब खलबली नहीं मचाता। देश में १९८४ सिखों पर हमला, १९९२ बाबरी ध्वंस आदि मामलों में क्या इन पर सवाल नहीं खड़े हुए। ये और बात है इन कांग्रेसियों को सजा नहीं होगी और एक के आरोपी होने पर दूसरा बचाव में भी खड़ा होगा। अवधी में एक कहावत है आंधर बांटे सिन्नी फिर-फिर अपुवैं लेई, इसके अर्थ को यहां तक देखा जा सकता है। गैस त्रासदी मामले में दोषी एंडरसन को भगाने में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर उनके प्रधान सचिव पीसी एलेक्जेंडर का संदेह करना या भूमिका होने की शंका करना कुछ यही कहानी बयां करता है। वैसे कांग्रेसियों पर आरोप लगने पर न्यायालय को दोषी ठहराना उनकी पुरानी आदत है (कानून मंत्री दोषियों को पर्याप्त सजा न मिलने के लिए कोर्ट को जिम्मेदार मानते हैं, इनको याद नहीं है कि कोर्ट के कितने निर्णयों को इन्होंने पलटा है और कितनों को अब तक लटकाए रखा है ऐसे बहुत से उदाहरण पीडि़तों को याद है)
बौखलाहट या दंभ?
-
उत्तरप्रदेश की जनता का अपमान राष्ट्रपति शासन की धमकी
उ त्तरप्रदेश में पांच चरणों के मतदान के बाद आ रहे रुझान देखकर कांग्रेस की
सिट्टी-पिट्टी गुम है। कांग्...
1 दिन पहले
2 टिप्पणियाँ:
बिलकुल सही लिखा.... कांग्रेस देश की दुर्गति के लिए सबसे अधिक जिमेदार है... जिस साल में हम आज़ाद हुए थे उसी समय के आसपास कई देश आज़ाद हुए थे.. लेकिन वो आज बहुत आगे निकल गए है... और हम बहुत पीछे कारन एक ही रहा कांग्रेस का शासन.... भोपाल गैस त्रासदी में जिन लोगो ने जान खोई उसके लिए सीधे-सीधे कांग्रेस जिम्मेदार है.... हत्यारे को ससम्मान हवाईजहाज में बिठा कर उसे सुरक्षित उसके देश भेजा.... कांग्रेस के काण्ड अपने गिनाये उनमे बहुत से छुट गए... जैसे आपातकाल, जीप घोटाला, बोफोर्स काण्ड, गुजरात का सीमेंट घोटाला और भी बहुत है......
Congress is responsible for the fall of this country.
Sab le-kar doobegi.
एक टिप्पणी भेजें